गत 13 अगस्त को अमरीकी राष्ट्रपति ने यूएई और इस्राईल के बीच संबंध स्थापना की खबर दी तो इस्लामी और अरब जगत में उसे एक गद्दारी कहा गया लेकिन फार्स की खाड़ी के अधिकांश अरब देशों ने या तो इस समझौते का स्वागत किया या फिर चुप्पी साध ली। इन देशों की चुप्पी समझ में आती है क्योंकि इनमें से हर देश अलग अलग संकटों में फंसे हैं जिसकी वजह से वह यह नहीं चाहते कि फिलहाल यूएई और अमरीका से उनके संबंध खराब हों। इराक़, जार्डन, कुवैत और मोरक्को इन देशों में शामिल है। इन देशों की चुप्पी समझ में इस लिए भी आती हैं कि वहां वैचारिक सत्ता नहीं है लेकिन सीरिया की खामोशी समझ से बाहर है। हालांकि सीरिया की सरकार ने यूएई और इस्राईल के बीच संबंधों पर प्रतिक्रिया प्रकट करने की कोशिश की लेकिन वह औपचारिक नहीं बल्कि प्रचारिक थी। सीरिया की ओर से बश्शार असद की मीडिया सलाहकार बुसैना शाबान ने और इसी तरह बास पार्टी ने प्रतिक्रिया प्रकट की लेकिन दोनों में से किसी को भी सरकारी और औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं कहा जा सकता।
बुसैना शाबान का जो पद है उस पर रहते हुए वह फैसले में कोई भूमिका नहीं रखतीं और व्यवहारिक रूप से भी वह अलमयादीन टीवी चैनल पर टीकाकार के रूप में अपने विचार प्रकट कर रही थीं। बास पार्टी का बयान भी सरकारी नहीं बल्कि दल की ओर से था। कुछ लोगों को उम्मीद थी कि सीरिया का विदेशमंत्रालय यूएई और इस्राईल के संबंधों पर प्रतिक्रिया प्रकट करेगा लेकिन सीरिया के विदेशमंत्रालय ने कोई प्रतिक्रिया प्रकट नहीं की।
सीरिया की खामोशी इस लिए भी आश्चर्यजनक है क्योंकि यह एकमात्र अरब देश है जो इस्राईल के खिलाफ अरब राष्ट्रवाद का प्रचार करता है। बास पार्टी एक अरब राष्ट्रवादी पार्टी है जो वैचारिक रूप से इस्राईल का विरोधी है और शायद यही वजह है कि सीरिया ने सरकार के बजाए इस पार्टी के मंच से इस्राईल का विरोध करना उचित समझा।

कुछ टीककारों का ख्याल है कि यूएई और इस्राईल के संबंधों पर सीरिया की चुप्पी की वजह सीरिया के हालात और अबूधाबी से उसकी दोस्ती है। रसीफ – 24 वेबसाइट ने सीरियाई विदेशमंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया है कि सीरिया की खामोशी की वजह, देश का संकट है।
दर अस्ल सीरिया में युद्ध का संकट लगभग खत्म हो चुका है और अब यह देश, पुनर्निमाण के चरण में है और यूएई उन पहले देशों में था जिन्होंने सीरिया से संबंध बनाने के लिए क़दम बढ़ाया। यूएई ने सन 2018 के अंत में दमिश्क में अपना दूतावास भी खोल लिया जिसका सीरिया ने स्वागत किया और इसे अरब देशों के साथ संबंधों की बहाली की दिशा में पहला क़दम बताया।
दिसंबर सन 2019 में सीरिया और यूएई के संबंधों में बड़े बदलाव आए। इस दिन सीरिया में यूएई के दूतावास में राष्ट्रीय दिवस का कार्यक्रम हुआ जिसमें सीरिया के उप विदेशमंत्री फैसल अलमिक़दाद ने भाग लिया। इस अवसर पर सीरिया में यूएई के प्रभारी राजदूत अब्दुलहकीम इब्राहीम अन्नईमी ने कहा कि बश्शार असद एक बुद्धिमान नेता हैं और आशा है कि उनके नेतृत्व में सीरिया में एक बार फिर शांति स्थापित होगी जिस पर अलमेक़दाद ने कहा कि सीरिया आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध के दौरान यूएई की मदद को कभी नहीं भूल सकता।

गत मार्च में यूएई के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन ज़ायद और सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद के बीच टेलीफोनी वार्ता से दोनों देशों के संबंध चरम पर पहुंच गये लेकिन सीरिया के खिलाफ अमरीकी प्रतिबंधों के लागू होने के बाद यूएई और सीरिया के संबंधों में विस्तार की प्रक्रिया रुक गयी क्योंकि सीरिया के मामले में अमरीका के विशेष दूत जेम्ज़ जेफरी ने धमकी दी थी कि अगर यूएई ने सीरिया से संबंध बनाए रखा तो उसे अमरीकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
वर्तमान समय में सीरिया पर अमरीका के व्यापक प्रतिबंध लगे हुए हैं और वह विभिन्न संकटों में फंसा हुआ है इस लिए यूएई के साथ संबंध बनाए रखना उसके लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यूएई भले ही प्रतिबंधों की वजह से सीरिया की आर्थिक मदद नहीं कर पाएगा लेकिन वह सीरिया पर प्रतिबंध खत्म कराने के लिए अमरीका में कोशिश कर सकता है और इसी तरह सीरिया को अरब लीग में वापस बुलाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है। शायद यही वजह है कि सीरिया ने इस्राईल से संबंध बनाने पर यूएई की कड़े शब्दों में आलोचना से परहेज़ किया है।Q.A.
लेख में कहीं गयी बातों से पार्ट टूडे का सहमत होना ज़रूरी नहीं।